Raj GK
Q21. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q22. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q23. गीतिका छंद के विषय में असंगत है- गीतिका छंद के विषय में असंगत है- गीतिका छंद के विषय में असंगत है- गीतिका छंद के विषय में असंगत है- गीतिका छंद के विषय में असंगत है- गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q24. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q25. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q26. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q27. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q28. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q29. गीतिका छंद के विषय में असंगत है-
- 1. यह मात्रिक सम छंद है।
- 2. प्रत्येक चरण के अंत में लघु-गुरु होता है।
- 3. प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
- 4. 12, 14 पर यति होती है।
Q30. शक्ति (प्रतिभा), निपुणता एवं अभ्यास तीनों को सम्मिलित रूप से काव्य हेतु मानने वाले आचार्य हैं-
- 1. राजशेखर
- 2. जयदेव
- 3. मम्मट
- 4. पंडितराज जगन्नाथ
Q31. प्रयोगवाद को स्पष्ट करते हुए अज्ञेय की उक्ति \"प्रयोग का कोई वाद नहीं है प्रयोग अपने आप में इष्ट नहीं है, वह साधन है और दोहरा साधन है। क्योंकि एक तो वह उस सत्य को जानने का साधन है, जिसे कवि प्रेषित करता है, दूसरे वह उस प्रेषण की क्रिया को और उसके साधनों को जानने का भी साधन है।\" किस संग्रह की भूमिका में लिखी गई है?
- 1. दूसरा सप्तक
- 2. तीसरा सप्तक
- 3. तार सप्तक
- 4. चौथा सप्तक
Q32. निम्नलिखित में से नन्ददास की रचना है-
- 1. वाग्विलास छटा
- 2. कल्पतरु
- 3. नंदलाल छटा
- 4. रसमंजरी
Q33. निम्नलिखित में से नन्ददास की रचना है-
- 1. निम्नलिखित में से नन्ददास की रचना है-
- 2. वाग्विलास छटा
- 3. कल्पतरु
- 4. नंदलाल छटा
Q34. sdsadasdsds
- 1. dsdsada
- 2. dsadsad
- 3. dsdsd
- 4. sdsdsd

