देश में सहकारिता आन्दोलन की शुरूआत कब हुई?

 

(Co-operative Banks)

सहकारी बैंकों का गठन तीन स्तरों वाला है। 

राज्य सहकारी बैंक सम्बन्धित राज्य में शीर्ष संस्था होती है। इसके बाद केन्द्रीय या जिला सहकारी बैंक जिला स्तर पर कार्य करते हैं। तृतीय स्तर प्राथमिक ऋण समितियों का होता है, जोकि ग्राम स्तर पर कार्य करती हैं।

सहकारी बैंक केवल निर्धारित क्षेत्र में ही अपना कार्य सीमित रखते हैं। उदाहरण के लिए राज्य सहकारी बैंक, जोकि शीर्ष सहकारी बैंक है, का कार्य क्षेत्र एक राज्य विशेष ही होता है। इसी प्रकार केन्द्रीय सहकारी बैंक किसी एक जिले विशेष में ही कार्य कर सकता है तथा सहकारी समिति (प्राथमिक ऋण सहकारी समिति) किसी एक स्थानीय क्षेत्र में ही अपना कार्य कर सकती हैं।

वाणिज्यिक बैंकों पर बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की सभी धाराएं लागू होती हैं, जबकि सहकारी बैंकों पर इस अधिनियम की कुछ की धाराएँ ही लागू होती हैं। अतः सहकारी बैंकों पर रिजर्व बैंक का नियन्त्रण केवल आंशिक होता है।

सहकारी ढांचे के अन्तर्गत केवल राज्य सहकारी बैंकों को ही भारतीय रिजर्व बैंकों के पास पहुँच करने के अधिकार प्राप्त हैं।

प्राथमिक साख समितियाँ- 

इनकी स्थापना कृषि क्षेत्र की अल्पकालीन ऋणों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए की गई है। एक गाँव अथवा क्षेत्र के कोई भी कम-से-कम दस व्यक्ति मिलकर एक प्राथमिक साख समिति का निर्माण कर सकते हैं।

ये समितियाँ प्राथमिक कृषि साख समितियाँ भी कहलाती हैं तथा सामान्यतः यह उत्पादक कार्यों के लिए अल्पकालीन (एक वर्ष के लिए) ऋण देती हैं।

केंद्रीय सहकारी बैंक- 

इसे जिला सहकारी बैंक भी कहा जाता है। इनका कार्य क्षेत्र एक जिले तक ही सीमित रहता है। यह बैंक सहकारी साख समितियों को आवश्यकतानुसार ऋण प्रदान करते हैं, जिससे कि ये समितियाँ कृषकों तथा अन्य सदस्यों को समुचित आर्थिक उपलब्ध करा सकें।

केन्द्रीय सहकारी बैंक अपनी चालू पूंजी में राज्य सहकारी बैंक (State Co-operative Bank) से ऋण लेकर वृद्धि करते हैं तथा सहकारी समितियों को ऋण देते हैं। इनके ऋण की अवधि भी एक से तीन वर्ष तक की हो सकती है। इस प्रकार अधिकांश केन्द्रीय बैंक राज्य सहकारी बैंक तथा प्राथमिक ऋण समितियों के मध्य अन्तवर्ती का कार्य करते हैं।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

Regional Rural Bank

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की स्थापना 2 अक्टूबर, 1975 को की गई। एक साथ पाँच क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक स्थापित किये गये- उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद और गोरखपुर, हरियाणा में भिवानी, राजस्थान में जयपुर तथा पश्चिम बंगाल में माल्दा में इन बैंकों की स्थापना की गई। बाद में देश के अन्य भागों में पर इसका विस्तार किया गया।

इस बैंक की स्थापना का उद्देश्य दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बौंकिग सुविधाएँ प्रदान करना है। यह बैंक सिक्किम व गोवा के अलावा सभी राज्यों में कार्यरत हैं सितम्बर, 2005 तक 196 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक कार्यरत थे और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के सम्बन्ध में गठित किए गए कार्यकारी दल (केलकर समिति) की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए अप्रैल, 1987 के बाद कोई नया बैंक नहीं खोला गया।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को एक करने तथा उन्हें और सशक्त बनाने के विचार के साथ भारत सरकार ने सितम्बर, 2005 में चरणबद्ध तरीके से इन बैंकों को मिलाने की प्रक्रिया शुरू की थी तद्नुसार 31 मार्च, 2010 को इन बैंकों की संख्या 32 (46 विलयीकृत तथा 36 पृथक) हो गई। इस बैंकों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण के एक भाग के रूप में 31 मार्च, 2007 को नकारात्मक नेटवर्थ वाले 27 बैंकों के पुनः पूंजीकरण का काम 2007-08 में प्रारंभ किया गया था।

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के पूँजीगत आधार को मजबूती प्रदान करने के लिए 1100 करोड़ रुपए की केन्द्रीय सहायता को मंजूरी केन्द्रीय मंत्रिमण्डल की 10 फरवरी, 2011 को सम्पन्न बैठक में प्रदान की गई। इन बैंकों की पूँजी में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार व प्रवर्तक बैंक का योगदान क्रमशः 50, 15 व 35 प्रतिशत होता है।

देश में सहकारिता आन्दोलन की शुरूआत कब हुई?

-1904 में सहकारी साख समिति अधिनियम से

भारत मे सहकारी आन्दोलन का जनक किसे माना जाता है?

-एफ. निकोलसन को

सहकारिता की उत्पत्ति कहाँ हुई?

-ब्रिटेन (यूरोप में)

प्राथमिक सहकारी बैंकों को अपने कुल अग्रिमों का कितना प्रतिशत प्राथमिक क्षेत्र तथा कमजोर वर्गों को आबंटित करना होता है?

-क्रमशः 60 और 25 प्रतिशत

देश में सर्वाधिक शहरी सहकारी बैंक किस राज्य में स्थित हैं?

-महाराष्ट्र में

अल्पकालीन ऋण (एक वर्ष के लिए) कौन-सी सहकारी समिति प्रदान करती है? 

-प्राथमिक साख समितियाँ

केन्द्रीय सहकारी बैंक किस स्तर पर कार्य करती है?

-जिला स्तर पर (मध्यकालीन, 1 वर्ष से अधिक और तीन वर्ष तक का) ऋण प्रदान करती है।

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