प्राचीन भारत के प्रसिद्ध युद्ध


दाशराज्ञ युद्ध (ऋग्वैदिक काल)

  • दाशराज्ञ युद्ध ऋग्वैदिक काल में आर्य शासक ‘भरत कुल’ तथा अन्य 10 राजाओं के बीच परुष्णी (रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था, जिसमें भरत कुल का राजा सुदास विजयी हुआ।

वितस्ता का युद्ध (326 ईसा पूर्व)

  • मेसिडोनिया (मकदूनिया, यूनान) के क्षत्रप फिलिप द्वितीय के पुत्र सिकंदर ने अपने विश्व विजय अभियान के तहत 326 ईसा पूर्व में झेलम नदी के तट पर ‘वितस्ता’ (हायडेस्पस) के युद्ध में पोरस (पुरु) को हराया, जिसका राज्य झेलम नदी एवं चिनाव नदियों के बीच था। बाद में सिकंदर ने पोरस को उसका राज्य वापस लौटा दिया।

चंद्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस के मध्य युद्ध 305 ईसा पूर्व

  • बेबीलोन के यूनानी शासक सेल्यूकस निकेटर अपने पूर्वी अभियान के तहत भारत आया था सिंधु नदी पार करने के बाद 305 ई. पूर्व में उसका चंद्रगुप्त मौर्य की सेना से सामना हुआ, जिसमें उसकी पराजय हुई। सेल्यूकस ने संधि कर ली और अपनी पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त से कर दिया। 
  • इतिहासकारों के मुताबिक सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त को अपने चार प्रांत- एरिया (काबुल), अराकोसिया (कंधार), जेड्रोसिया (मकरान) और पेरीपेमिसदाई (हेरात) प्रदेश दहेज में दिए। उसने मेगस्थनीज को अपने राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा।

कलिंग युद्ध 261 ईसा पूर्व

  • मौर्य सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के नौवें वर्ष कलिंग पर आक्रमण किया और जीत हासिल की।​ प्लिनी की पुस्तक में उद्धृत मेगस्थनीज के विवरण के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य के समय में कलिंग एक स्वतंत्र राज्य था। कलिंग युद्ध में नरसंहार तथा विजित देश की जनता के कष्टों को देखकर अशोक की अंतरात्मा में तीव्र आघात पहुंचा। इस युद्ध की भीषणता का अशोक पर गहरा प्रभाव पड़ा। 
  • इसके बाद अशोक ने युद्ध नीति को सदा के लिए त्याग दिया और दिग्विजय के स्थान पर धम्म विजय की नीति को अपनाया।
  • डॉक्टर हेमचंद्र राज चौधरी के अनुसार मगध का सम्राट बनने के बाद यह अशोक का प्रथम तथा अंतिम युद्ध था। कलिंग की प्रजा के प्रति कैसा व्यवहार किया जाए, इस संबंध में अशोक ने दो आदेश जारी किए, जो धौली और जौगड़ नामक स्थानों पर सुरक्षित है।

डिमेटरियस प्रथम का आक्रमण

  • बैक्ट्रिया के यूनानी शासक डिमेट्रियस प्रथम (220 से 175 ई.पू.) ने 183 ई. पू. के लगभग पंजाब पर आक्रमण करके एक बड़ा भाग जीत लिया और साकल को अपनी राजधानी बनाया। उसने भारतीयों की राजा की उपाधि धारण की तथा यूनानी व खरोष्ठी दोनों लिपियों में यूनानी सिक्के चलाए।

मिनांडर का आक्रमण (155 ई.पू.)

  • प्रसिद्ध यूनानी राजा मिनांडर (160—120 ई.पू.) ने लगभग 155 ई. पू. में भारत पर आक्रमण किया और काफी बड़े  क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। बौद्ध साहित्य में उसे ‘मिलिन्द’ कहा गया है।
  • बौद्ध ग्रंथ ‘मिलिन्दपन्हो’ में मिनांडर के बौद्ध भिक्षु नागसेन के साथ वाद-विवाद के उपरांत बौद्ध धर्म का अनुयायी बनने की कथा वर्णित है।

हूण आक्रमण

  • उत्तर—पश्चिमी भारत पर पहला हूण आक्रमण लगभग 454 ई. के लगभग हुआ। संभवत: ‘तोरमाण’ हूणों का प्रथम शासक था। उसके बाद उसके पुत्र ‘मिहिरकुल’ ने भारत के आंतरिक भागों पर आक्रमण किए।
  • मंदसौर अभिलेख के अनुसार मध्य भारत के नवोदित यशोधर्मन विष्णुवर्धन ने 532 ई. के लगभग मिहिरकुल को पराजित किया।
  • ह्वेनसांग के अनुसार मगध के शासक नरसिंह गुप्त बा​लादित्य ने भी मिहिरकुल को पराजित करने में सफलता प्राप्त की।

मध्यकालीन भारत

अरब आक्रमण (712 ई.)

  • इराक के गवर्नर अल हज्जाज के भतीजे व दामाद ‘मुहम्मद—बिन—कासिम’ ने मात्र 17 वर्ष की आयु में सिंध पर सफल आक्रमण किया था। इसे भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण माना जाता है।

मुंगेर का युद्ध (809 ईस्वी)

  • मुंगेर का युद्ध गुर्जर—प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय ने पाल शासक धर्मपाल को हराया।
  • आबू पर्वत की तलहटी का युद्ध 1178 ई. में गुजरात के चालुक्य राजा मूलराज (भीम) ने मुहम्मद गोरी को पराजित किया।

तराइन का प्रथम युद्ध

  • 1191 ई. में दिल्ली के चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय ने तुर्क आक्रमणकारी मुहम्मद गोरी को हराकर उसे वापस खदेड़ा।

तराइन का द्वितीय युद्ध

  • मुहम्म्द गोरी तराइन के पहले युद्ध हुई हार का बदला लेना चाहता था। वह इसके लिए सालभर तक तैयारी करता रहा और 1192 ई. में 1 लाख 20 हजार सैनिकों के साथ उसी तराइन के मैदान में पृथ्वीराज से युद्ध करने आया। इस युद्ध में गोरी ने एक दिन सुबह पृथ्वीराज की सेना पर अचानक आक्रमण कर दिया। इससे पृथ्वीराज की पराजय हुई।

चंदावर का युद्ध 1193 ई.

  • मुहम्मद गोरी त​था उसके प्रमुख सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक के नेतृत्व में तुर्क सेना ने वर्ष 1193 में चंदावर के युद्ध में कन्नौज के गहड़वाल शासक जयचंद (1170—93 ई) को पराजित किया और उसे मार डाला।

पानीपत का प्रथम युद्ध

  • पानीपत का प्रथम युद्ध 20 अप्रैल, 1526 ई. में फरगना के शासक बाबर तथा दिल्ली के लोदी सुल्तान इब्राहिम लोदी की सेनाओं के बीच हुआ। इस युद्ध में बाबर ने तुलगुमा पद्धति से लड़ाई लड़ी जिसमें वह विजयी हुआ। बाबर ने भारत में मुगल वंश की स्थापना की।

खानवा का युद्ध

  • आगरा में खानवा नामक स्थान पर 16 मार्च, 1527 ई. में मुगल बादशाह बाबर और मेवाड़ के राणा सांगा की सेनाओं के बीच लड़ा गया युद्ध। बाबर ने इसी युद्ध में पहली बार ‘जेहाद’ का नारा दिया था और युद्ध में विजयी हाने के बाद उसने ‘गाजी’ की उपाधि धारण की थी।

घाघरा का युद्ध

  • 6 मई, 1529 को हुए घाघरा का युद्ध में बाबर की सेना ने बिहार—बंगाल में सक्रिय अफगानों को हराया।

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