क्रिप्स मिशन भारत कब आया था

क्रिप्स मिशन (22 मार्च, 1942 ई.)

अमेरिका, रूस और फ्रांस के द्वारा संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिये दबाव देने पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल ने स्टैफोर्ड क्रिप्स की अध्यक्षता में एक मिशन 22 मार्च, 1942 को भारत भेजा जिसे ‘क्रिप्स मिशन’ कहा जाता है। इसके अन्य सदस्य थे ए.वी अलेक्जेण्डर तथा पैथिक लारेंस। इसके प्रमुख प्रस्ताव थे-

युद्ध के बाद एक नये भारतीय संघ की व्यवस्था होगी। इस संघ में ब्रिटिश भारतीय प्रान्तों के साथ देसी रियासतों के प्रतिनिधि शामिल किये जायेंगे।

युद्ध समाप्त होने पर एक निर्वाचित संविधान निर्मात्री सभा का गठन किया जायेगा, परन्तु अल्पसंख्यकों पर जबरदस्ती यह संविधान नहीं थोपा जायेगा।

जिन प्रान्तों को यह संविधान पसंद नहीं होगा, वे अपनी वर्तमान संवैधानिक स्थिति को बनाए रख सकेंगे या फिर उन्हें भी अपने लिए संविधान बनाने का अधिकार होगा।
कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि यह भारतीय एकता एवं अखण्डता के लिये घातक था। गाँधीजी ने इस प्रस्ताव को “दिवालिया बैंक के नाम भविष्य की तिथि में भुनाने वाला चेक” कहा तथा नेहरू ने कहा कि “क्रिप्स प्रस्ताव एक ऐसे बैंक के नाम चेक है जो टूट रहा है।” मुस्लिम लीग ने भी इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि इसमें ‘पाक’ का उल्लेख नहीं था।

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