डॉ. धरमवीर भारती के ‘अंधायुग’ नाटक का कर चुके हैं कई रंगकर्मी मंचन

Dharmaveer Bharatii
  • डॉ. धरमवीर भारती हिंद साहित्य के प्रसिद्ध कवि, लेखक, नाटककार और एक सामाजिक विचारक हैं। उन्होंने प्रसिद्ध हिंदी साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ के प्रमुख संपादक पद पर वर्ष 1960 से 1987 तक कार्य किया।

आरंभिक जीवन परिचय

  • धरमवीर भारती का जन्म 25 दिसंबर, 1926 को इलाहाबाद के एक कायस्थ परिवार में हुआ। उनके पिता चिरंजी लाल और माता चंदा देवी थी। उनके सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। इसके बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। उनकी एक बहन डॉ. वीरबाला थी।
  • डॉ. भारती ने वर्ष 1954 में कांता नामक महिला से शादी की, जिससे उनके एक बेटी का जन्म हुआ। लेकिन कुछ साल बाद कांता से तलाक ले लिया और उन्होंने पुष्पा भारती से दूसरा विवाह कर लिया। जिससे एक बेटा किंशुक और एक बेटी प्रज्ञा भारती का जन्म हुआ।

 

शिक्षा

  • उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी स्कूल में हुई।
  • वर्ष 1946 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में मास्टर डिग्री हासिल की और हिंदी में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर उन्हें “चिंतामणि गोल्ड मैडल” से सम्मानित किया गया। पढ़ाई के साथ ही वह आजीविका के लिए अभ्युदय और संगम पत्रिकाओं के उप-संपादक भी थे।
  • उन्होंने वर्ष 1954 में डॉ. धीरेंद्र वर्मा के अधीन “सिद्ध साहित्य” विषय पर पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
  • बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी के व्याख्याता नियुक्त किए गए।

साहित्य के क्षेत्र में उपलब्धियां

  • वर्ष 1960 में बॉम्बे स्थित टाइम्स समूह ने अपनी लोकप्रिय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ के लिए डॉ. धरमवीर भारती मुख्य संपादक नियुक्त किया। वह वर्ष 1987 तक धर्मयुग के संपादक पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने भारत—पाकिस्तान युद्ध में फील्ड रिपोर्टर के रूप में कार्य किया।
  • उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘सूरज का सातवां घोड़ा’, ‘गुनाहों का देवता’ बेहतरीन उपन्यास थे। ‘कनुप्रिया’ खंडकाव्य था। उनके ‘अंधायुग’ एक ऐसी रचना, जिस पर इब्राहिम अल्काजी, एम के. रैना, रतन थियम और अरविंद गौर जैसे दिग्गज रंगकर्मी नाटक कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘मुर्दों का गांव’, ‘स्वर्ग और पृथ्वी’,’चांद और टूटे हुए लोग’ और ‘बंद गली का आखिरी मकान’ जैसी किताबें भी लिखीं।

उनकी रचनाएं

  • काव्य – ठंडा लोहा, सात गीत वर्ष, कनुप्रिया, सपना अभी भी
  • पद्य नाटक – अंधा युग 1953,  उनका ऐसा प्रसिद्ध नाटक है जिसका देश के कई जानेमाने रंगमंच निर्देशकों ने इसका मंचन किया है।
  • उपन्यास – गुनाहों का देवता।
    ‘सूरज का सातवां घोड़ा’ — इस पर वर्ष 1992 में फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल ने फिल्म बनाई जिसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
  • कहानी – मुरदों का टीला, स्वर्ग और पृथ्वी, चांद और टूटे हुए लोग, बंद गली का आखिरी मकान।
  • निबंध – ठेले का हिमालय, कहानी-अनकहनी, पश्यन्ती, साहित्य विचार और स्मृति
  • रिपोर्ताज – मुक्त क्षेत्रे: युद्ध क्षेत्रे, युद्ध यात्रा, ब्रह्मपुत्र का मोर्चा
  • आलोचना – प्रगतिवाद:एक समीक्षा, मानव मूल्य और साहित्य
  • संपादन – अभ्युदय, संगम, हिंदी साहित्य कोष (कुछ अंश), आलोचना निकष, धर्मयुग

सम्मान

  • डॉ. धरमवीर भारती भारत सरकार ने वर्ष 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।
  • डॉ. धर्मवीर भारती के साहित्य की ज्यादातर रचनाएं बेहद लोकप्रिय रही हैं। उन्हें कई साहित्य सम्मानों से पुरस्कृत किया गया। उन्हें पत्रकारिता और साहित्य लेखन के लिए हल्दीघाटी श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार, महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन, साहित्य अकादमी रत्न, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली, भारत भारती सम्मान, उत्तर प्रदेश, बिड़ला फ़ाउंडेशन के व्यास सम्मान आदि से सम्मानित हो चुके थे।

निधन

  • डॉ. धरमवीर भारती का 4 सितंबर, 1997 को हार्ट अटैक आने की वजह से देहांत हो गया।

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