दक्षिण भारत में चिश्ती सिलसिले को प्रारंभ करने का श्रेय किसे दिया जाता है?

निम्नलिखित ऐतिहासिक व्यक्तियों के नाम कालक्रमानुसार संयोजित कर नीचे दिये गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
1. नागभट्ट द्वितीय
2. महीपाल
3. महेन्द्रपाल
4. वत्सराज
कूट:
अ. 2,3,1,4
ब. 4,1,3,2
स. 1,2,3,4
द. 3,1,4,2
उत्तर— ब

गुर्जर प्रतिहार शासकों में से किसकी उपाधि ‘आदि वराह’ थी?
अ. वत्सराज
ब. नागभट्ट द्वितीय
स. मिहिर भोज
द. नागभट्ट प्रथम
उत्तर— स

बंगाल में कैवर्त विद्रोह किसके राज्यकाल में हुआ था?
अ. देवपाल
ब. विग्रहपाल
स. महीपाल द्वितीय
द. रामपाल
उत्तर— द

‘निरालम्बा सरस्वती’ (सरस्वती अब निराश्रय हो गयी) एक कवि द्वारा किसकी मृत्यु पर कहा गया?
अ. चाहमान बीसलदेव
ब. चन्देल कीर्तिवर्मा
स. मिहिर भोज
द. भोज परमार
उत्तर— द

निम्नलिखित में से किस राष्ट्रकूट शासक ने सल्लेखणा को ग्रहण किया?
अ. दंतिदुर्ग
ब. अमोघवर्ष
स. कृष्ण तृतीय
द. इन्द्र चतुर्थ
उत्तर— ब
अमोवर्ष का वास्तविक नाम शर्व था। प्रारम्भ में वह हिन्दू शाक्त धर्मावलम्बी था। परंतु वृद्धावस्था में पहुंच कर वह जैन धर्मावलम्बी हो गया। 64 वर्ष तक राज्य करने के उपरांत 880 ई. के लगभग उसने उपवास द्वारा (सल्लेखणा) अपने प्राण त्याग दिये।

कलिंग नरेश खारवेल निम्न में से किस वंश से सम्बन्धित है?
अ. मौर्य
ब. कदम्ब
स. चेदि
द. हर्यंक
उत्तर— स

वे उत्तर भारतीय राजवंश, जिन्होंने राष्ट्रकूटों का मुकाबला किया था, थे—
अ. प्रतिहार एवं परमार
ब. पाल एवं चन्देल
स. प्रतिहार एवं पाल
द. चालुक्य एवं चाहमान
उत्तर— स

सार्वभौम गुप्त वंश के बाद किस वंश ने ‘गरुड़’ को अपना राजचिह्न बनाया था?
अ. राष्ट्रकूट
ब. पश्चिमी चालुक्य
स. शिलाहार
द. चेदि
उत्तर— अ

निम्नलिखित में से कौन त्रिकोणात्मक संघर्ष का हिस्सा नहीं था?
अ. प्रतिहार
ब. पाल
स. राष्ट्रकूट
द. चोल
उत्तर— द

लक्ष्मण संवत का प्रारंभ निम्नलिखित किस वंश द्वारा किया गया था?
अ. प्रतिहारों द्वारा
ब. पालों द्वारा
स. चौहानों द्वारा
द. सेनों द्वारा
उत्तर— द

निम्न में से कौन चन्देल शासक जो महमूद गजनवी से पराजित नहीं हुआ था—
अ. धंग
ब. विद्याधर
स. जयशक्ति
द. डंग
उत्तर— ब

दक्षिण भारत में चिश्ती सिलसिले को प्रारंभ करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
– निजामुद्दीन औलिया के शिष्य ‘शेख बुरहानुद्दीन गरीब’ को दक्षिण भारत में चिश्ती सिलसिले को प्रारंभ करने का श्रेय जाता है। इन्होंने दौलताबाद को अपने प्रचार-प्रसार का केंद्र बनाया।

निम्नलिखित में से कौन अपने को ‘ब्रह्म—क्षत्रिय’ कहते थे?
अ. पाल
ब. सेन
स. प्रतिहार
द. चाहमान
उत्तर— ब

देवपाल के काल में नालन्दा विहार बनवाने वाले बालपुत्रदेव कौन थे?
अ. शैलेन्द्र राजा
ब. शिलाहार राजा
स. पाल राजा
द. भीमकर राजा
उत्तर— अ

जावा के शैलेन्द्र वंशीय राजा बालपुत्रदेव के अनुरोध पर पाल शासक देवपाल ने उसे नालन्दा में विहार बनवाने की अनुमति प्रदान की।
इसके लिए देवपाल ने 5 गांव दान में दिये। देवपाल भी बौद्ध मतानुयायी था। उसने परमसौगात की उपाधि धारण की थी।

जेजाकभुक्ति प्राचीन नाम था—
अ. बघेलखंड का
ब. बुंदेलखंड का
स. मालवा का
द. विदर्भ का
उत्तर— ब

विक्रमशिला महाविहार की स्थापना का श्रेय किसे दिया जाता है?
अ. हर्ष
ब. भास्करवम्रन
स. धर्मपाल
द. विजयसेन
उत्तर— स
धर्मपाल एक उत्साही बौद्ध था। उसके लेखों में उसे परमसौगात कहा गया है। उसने विक्रमशिला तथा सोमपुरी (पहाड़पुर) में प्रसिद्ध विहारों की स्थापना की।
उसकी राजसभा में प्रसिद्ध बौद्ध लेखक हरिभद्र निवास करता था।

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